1. घनानंद किस काल के कवि हैं ?
2. ‘सुजानसागर’ किसकी कृति है ?
3. किसे ‘प्रेम की पीर’ का कवि कहा जाता है ?
4. ‘लाक्षणिक मूर्तिमत्ता और प्रयोग वैचित्र्य’ के कवि कौन हैं ?
5. रीतिमुक्त काव्यधारा के सिरमौर कवि किसे कहा जाता है ?
7. ‘प्रेमधन’ किस युग के कवि थे ?
8. कवि ‘प्रेमधन’ के अनुसार भारत में आज कौन-सी वस्तु दिखाई नहीं पड़ती ?
9. घनानंद किससे प्रेम करते थे ?
11. मुग़ल बादशा मुहम्मदशाह रँगीले के यहाँ क्या काम करते थे ?
12. प्रहित्त के लिए देह कौन धारण करता है ?
13. कवि अपने आँसुओं को कहाँ पहुँचाना चाहता है ?
14. ‘निःस्वार्थ भाव से, निश्चल होकर अपने को समर्पित कर देना किसका कथन है ?
15. घनानंद की महत्वपूर्ण रचना है:
16. ‘घनानंद ग्रंथवाली’ का सम्पादन किसने किया था:
17. घनानंद की कीर्ति का आधार है:
18. ‘मो सुखदायीआँसूवानिहिं लै बरसौ’ में किसकी है ?बात कही गई -
19. घनानंद के अनुसार , ‘प्रेम का मार्ग’ कैसा होता है ?
20.कवि प्रेममार्ग को अति सूधो कहता है क्यो कि ?
22.घनान्द की मृत्यु कब हुई ?
23.कवि ने परजन्य किसे कहाँ है ?
24. घनन्द का जन्म हुवा था ?
26. घनानन्द काव्य में किन शैलियों का प्रयोग मिलता है?
27. ऐकांतिक और एकांगी प्रेम के कवि है?
28. शंकालु ह्रदय नहीं कर सकता -
30.अति सूधो सनेह को मार्ग है, जहाँ नेकु सयानप बाँक नहीं | यह पंकित किस कवि की है?